चांद धरती से कितना दूर है । Chand Dharti Se kitna Dur hai

Chand Dharti Se kitna Dur hai :-  आप में से कई लोगों के बचपन में ही मन में यह सवाल जरूर आया होगा कि चांद धरती से कितना दूर है (Chand Dharti Se kitna Dur hai) और आपको इस सवाल का जवाब नहीं मिला होगा साथ में यह भी को आसमान में कितने तारे होते है,  लेकिन यह सभी बातें बचपन की है। जब हम स्कूल जाते हैं तो हमें साइंस और किताबों के बारे में पता चलता है जो हमें चांद (साइंस) की ओर और ज्यादा आकर्षित करता है।

थोड़ा सा और आगे पढ़ने पर हमें दो शख्स के नाम (नील आर्मस्ट्रांग और राकेश शर्मा) बताएं जाते हैं। जिन्होंने Interesting Facts About The Moon जानने की खोज को और आगे तक बढ़ाया और बचपन में हमें एक गीत भी सुनाई जाती थी। चंदा मामा दूर के लेकिन, इसमें यह तो बताया ही नहीं जाता था चांद धरती से कितना दूर है।

अक्सर आए दिन बचपन में हमलोगों के मन में हमेशा यह सवाल रहता ही है कि चांद धरती से कितना दूर है। मुझे उम्मीद है अगर आप इस पोस्ट को पढ़ने आए हैं तो आप भी इसे जानने के लिए उत्सूक है कि Chand Dharti se kitni Dur hai हैं या फिर Chand kitni Dur hai Dharti se. 

तो यदि आप हमारे इस लेख में आए है तो हम आपको चांद धरती से कितना दूर है विस्तार पूर्वक बताऊंगा और अगर आप इसे ध्यान से पढ़ते है तो आप भी सारे बातों को एकदम सरल भाषा में समझ जाएंगे, तो चलिए शुरू करते है और जानते है चांद धरती से कितने किलोमीटर दूर है-

Chand Dharti Se kitna Dur hai

चांद धरती से कितना दूर है?(Chand Dharti Se Kitna Dur Hai)

ऐसे तो वैज्ञानिकों द्वारा पूरा अनुमान नहीं लगाया गया है की चांद धरती से कितना दूर है लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए तथ्यों के अनुसार चांद धरती से लगभग 3,84,400 किलोमीटर दूर है। और यह जानकारी भी वैज्ञानिकों ने चांद और धरती के बीच न्यूनतम दूरी जो कि (3,63,104 किलोमीटर) है यह मिल में (2,25,622 मील) और इसका अधिकतम दूरी का आकड़ा (4,06,696 किलोमीटर) आता है, यह मील में तकरीबन (252,088 मील) होता है।

इन्हीं दोनों आंकड़ों के बीच की गणना के बाद औसत दूरी 3,84,400 किलोमीटर का आंकड़ा सामने आया था। जो चांद का धरती से लगभग दूरी है और आप लोगों को पता ही होगा प्रतिदिन चांद धरती के चारों ओर चक्कर लगाते रहता है। इसी के कारण चांद की सटीक दूरी बताना मुमकिन नहीं है, क्योंकि यह दूरी कभी ज्यादा तो कभी कम होते रहता है।

वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं के अनुसार पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद ही चांद का जन्म हुआ था, वैज्ञानिकों के अनुसार आज से करीब 450 सौ अरब साल पहले चांद अस्तित्व में आया था। जो कि पृथ्वी और थीप (मार्स के आकार का तत्व) के बीच हुए भीषण टकराव के बाद बचे हुए अवशेषों के मलवे से बना था। चंद्रमा के होने से पृथ्वी झुकी हुई है इसी के कारण से पृथ्वी पर सूर्य और चंद्र ग्रहण लगते रहते हैं।

धरती से चांद तक पहुंचने में कितना समय लगता है।

ऐसे तो बात करें चांद तक पहुंचने में अधिकांश चंद्र मिशन को लगभग 3 या 4 दिन तक का समय लगा है। इसके अलावा धरती से चांद तक पहुंचने में कितना समय लगता है, यह तो उस पर निर्भर करता है कि आप जिस विमान में यात्रा कर रहे हैं उसका गति कितना है।

अगर बात करें विमान कि तो पृथ्वी से चंद्रमा पर भेजे गए विमानों में सबसे कम गति वाला विमान ‘ESA स्मार्ट-1’ चंद्रमा पर 1 साल 1 महीने और 2 सप्ताह के बाद पहुंचा था। सबसे तेज गति के विमान की बात करें तो वह नासा ‘न्यू फोरिजन’ ने करीब 8 घंटे और 55 मिनट में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी तय किया था। यह पृथ्वी से चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम समय में करने वाला विमान था। 

चांद का आकार किस प्रकार है?

चांद के आकार प्रकार की बात करें तो यह गोल है और इसके पास खुद का प्रकाश नहीं होता है। यह सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है, चंद्रमा अपारदर्शी होता है इसका जो भाग सूर्य के सामने आता है वहीं भाग चमकता हुआ दिखाई देता है। और जो भाग सूर्य के सामने नहीं होता है, उस भाग में अंधेरा रहता है यही कारण है की चंद्रमा का आकार घटता और बढ़ता रहता है।

चांद का जन्म कब हुआ था?

वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए तथ्यों के अनुसार पृथ्वी के बनने के कुछ करोड़ों साल बाद ही चांद का जन्म हुआ था और यह भी अनुमान लगाया गया हैं कि 450 सौ साल पहले चांद अस्तित्व में आया था। जो पृथ्वी और थीय (मार्स के आकार का तत्व) के बीच हुए भीषण टकराव के बाद बचे हुए अवशेषों के होने से ही पृथ्वी रुकी हुई है इसी के कारण ही पृथ्वी पर सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण दोनों लगते हैं

चांद का धरती पर होने वाला असर क्या है?

चांद का जो गुरुत्वाकर्षण शक्ति होता है पृथ्वी पर काफी असर करता है इस वजह से पृथ्वी को अपने ध्रुव पर घूमने की गति का असर होता है इसी के कारण ही पृथ्वी के गुरुत्व के कारण चांद की कक्षा पर भी असर होता है। चांद के गुरुत्वाकर्षण के कारण ही इस प्रकार की प्रक्रिया होती है। टाइडल फ्रिक्शन इसका सीधा असर ज्वार भाटा जैसी गतिविधियों में देखने को मिलता है, देखा जाए तो इसका सीधा असर यह भी है की चांद पृथ्वी से हर साल 1.5 इंच दूर होते जा रहा है।

चांद पर पहला कदम कितने रखा है?

बात करें चांद पर पहला कदम की तो सबसे पहला नाम ‘नील आर्मस्ट्रांग’ ने 21 जुलाई 1969 ई० में रखा था और चांद पर कदम रखने का मिशन ‘अपोलो 11’ अंतरिक्ष यात्रा द्वारा किया गया था। बात करें अभी की तो अभी तक चंद्रमा पर कितने लोग जा चुके हैं।

चांद को पृथ्वी का चक्कर लगाना?

पृथ्वी के एक चक्कर लगाने में चांद को लगभग 27 दिन 7 घंटे 43 मिनट 11.5 सेकंड लगता है, चांद को अक्षीय दूरी पर पूरा एक चक्कर लगाने में 29 दिन 12 घंटे 44 मिनट 2.9 सेकेंड का समय लगता है।

चांद का तापमान क्या होता है?

पृथ्वी पर जैसे तापमान अलग-अलग जगह पर अलग अलग रहता है उसी तरह चांद पर भी अलग जगह पर अलग-अलग तापमान रहता है। तापमान दिन और रात में अलग होता है रात में चांद पर +0 डिग्री से -193 डिग्री सेल्सियस जबकि चांद पर दिन के समय का अधिकतम तापमान 127 डिग्री सेल्सियस रहता है कुछ गहरे केस में तो तापमान हमेशा -240 तक काम रहता है।

चांद पर इंसान का वजन क्या रहता है?

वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से कम होता है, सामान्य तौर पर देखा जाए तो चांद पर किसी व्यक्ति का वजन लगभग 16.5 फीसदी कम होता है।

चांद की कला एवं प्रकृति का नाम क्या है

चांद निम्नलिखित कलाओ से गुजरता है जो नीचे दिया गया है-

  • वर्धमान घटता चांद
  • पूर्णिया
  • अर्धचंद्र
  • कुबड़ा घटता चांद
  • अमावस्या
  • वर्धमान बढ़ता चांद
  • कुबड़ा बढ़ता चांद

अन्य प्रकार के लेख :-

चांद धरती से कितना दूर है से संबंधित FAQs –

Q.चांद का नक्शा पहली बार किसने बनाया?

ब्रिटिश खगोल और थॉमस हैरियट वैज्ञानिक ने पहली बार चांद का नक्शा बनाया था

Q.पृथ्वी से चंद्रमा तक पहुंचने में कितना समय लगता है?

पृथ्वी से चंद्रमा तक पहुंचने वाला समय आपके विमान पर निर्भर करता है जिससे आप यात्रा कर रहे हैं वैसे विमानों में देखा जाए तो ईएसए स्मार्ट -1 पृथ्वी से चंद्रमा पर सबसे कम गति वाला विमान है यह करीब 1 साल एक महीना और दो सप्ताह के बाद चंद्रमा पर पहुंचता है जबकि अब तक के सबसे तेज गति वाला विमान नासा न्यू होराइजंस ने लगभग 8 घंटे 35 मिनट में यह दूरी तय कर लेता है

Q.चांद पर भारत कब पहुंचा?

पहली बार चांद पर राकेश शर्मा जोकि भारतीय हैं उन्होंने 3 अप्रैल 1984 में चांद पर अपना पहला कदम रखा था

Q.क्या चांद पर पानी उपलब्ध है

चांद का वह हिस्सा जो हमेशा छाया में रहता है वहां पर बर्फ के रूप में पानी उपलब्ध है

Q.चांद और सूर्य में आकार में कौन बड़ा है

सूर्य का आकार चांद से करीब 400 गुना बड़ा है लेकिन पृथ्वी से सूर्य तथा चांद का आकार लगभग समान है इसका कारण यह है कि सूर्य की तुलना में चांद का आकार पृथ्वी के आकार के जैसा है

लेख का निष्कर्ष

आज मैंने अपने इस लेख के माध्यम से बताया है कि चांद धरती से कितना दूर है । [Chand Dharti Se kitna Dur hai] उम्मीद है कि आपको अपने सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा इसी तरह के और सवालों के जवाब के लिए हमें कमेंट करें और शेयर करें धन्यवाद!

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